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ज़िन्दगी र साथी (zindagi r sathi)

ज़िन्दगी र साथी

कुछ कह जाने से 

सिफॅ कह देने से सब हो जाता ,

तो सब कुछ कहा जा सकता है। 

सिफॅ कह देने से तुम कोशिश करोगे 

कोशिश  नहीं जायेगी। 

सिफॅ कह देने  से तुम रास्ते तलाशोगे 

रास्ते मिल नहीं जायेगे। 

सिफॅ कह देने तुम सब भूल चुके ,

भूल नहीं पाओगे। 

और सिफॅ कह देने से तुम सबकुछ पा  लोगे, 

पा नहीं पाओगे। 

किस चीज़  की तसल्ली देना है खुद को,

मन बहलाने के लिए क्यों कहना है खुद को ,

कहना नहीं हमें कर जाना है,

कोशिशें हो, रास्ते हो ,ज़िन्दगी हो ,

करने से ही बदलेंगी। 

क्योकि सिफॅ कह देने सब हो जाता,

तो सब कुछ कहा जा सकता है।  

ज़िन्दगी र साथी


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