जिंदगी रहे या ना रहे
जब हम ज़िन्दगी के उस मोड़ पर पहुंच जाते है ,जहाँ हमें किसी के
होने या ना होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता। तब हम अपनी आधी जग
जीते चुके होते है। क्योकि हम उस दौर से निकल चुके है जब किसी
और के लिए हम अपनी ज़िन्दगी अपने सपने खोने को तैयार नहीं है।
शायद ये बात कई बार हमसे जुड़े लोगो को अच्छी ना लगे ,पर
शायद तब उन्हें भी उतना मजबूत हो जाता चाहिए जितना आप
कभी हुए थे जब आपको सबकी जरूरत थी। क्योकि तब ही आपने
जाना था ज़िन्दगी में किसी का साथ होने से पहले खुद साथ होना
सबसे ज्यादा जरुरी है।
.jpg)
Post a Comment