ए ज़िन्दगी
एक सीमा तय होनी चाहिए ,
सब कुछ सह जाने की ,
हार जाओ चाहें कई दफा,
पर जो पार हो सीमा हार की
फिर तैयारी सिर्फ जीत की होनी चाहिए
चलो चाहें हमेशा नियमों पर,
पर जब पार हो सीमा खुद के सपनों के छीन जाने की ,
फिर ज़िद पे अड़ जाने को भी तैयार होना चाहिए
प्यार चाहें लाख गहरा हो ,
पर जब पार हो सीमा स्वाभिमान की ,
तब अपनी सहनशीलता पर प्रश्न होना चाहिए
रिश्ता चाहें कितना अजीज हो
पर जब पार हो सीमा खुद को खो जाने की ,
बंधन फिर वो भी टूटना चाहिए ,
एक सीमा तय होनी चाहिए
सबकुछ सह जाने की

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