Mai Hu Teri Parchai Maa - मैंं हूंं तेरी परछाई माँ - (जमना ),
आज की कहानी माँ के जैसे अपना जीवन जीती है कुछ ऐसी ही है एक महिला की आओ पढ़ते है
एक बड़े शहर में रहने वाली एक लड़की होती है जिस का नाम जमना होता है। घर में सब से छोटी बेटी होती है। जमना के चार बहने और तीन भाई थे। और जमना के पापा और माँ रहते थे बहुत ख़ुशी से सब रहते थे। जमना के पापा का घर का काम था खाजू बादाम का जिसे उनका घर का गुजरा हो जाता था। एक भाई सिलाई का काम करता घर पर ही और दो मजदूरी करते थे उनकी शादी हो चुकी थी और तीन बहन भी शादी हो गयी थी। जमना और एक बहन थी उनकी नहीं हुई शादी
सब से छोटी बेटी को पढ़ना चाहते थे। और अपने पैरो पर खड़ा करना चाहते थे। और जमना भी पढ़ी में बहुत होशियार होती है। छोटी बेटी का बहुत ख्याल रखते थे। प्यार भी बहुत करते थे। और जमना रोज स्कुल जाए करती थी।
जमना के पापा की एक दिन बहुत तबियत ख़राब हो जाती है जब जमना आठ वर्ष की थी। उनको हॉस्पिटल ले जाया जाता है। कुछ देर में जमना के पापा की मुत्यु हो जाती है। उस टाइम जमना बहुत छोटी होती है।
घर की जिम्मेदरी जमना की माँ पर आ जाती है। और वो अकेली अपने घर का खाजू बादाम का काम करने लगते है। फिर बच्चो के लिए जमना की माँ काम करने लगी। और जमना को भी पढ़ने लगी। जमना हर बात और काम अपनी माँ से ही सीखती थी।
जमना के पापा का सपना था जमना को डॉक्टर बना चाहते थे। पर पापा के मुत्यु के बाद घर के हालत बहुत ख़राब चलने लगे। जमना के पापा के चले जाने के बाद वो ऐसा कुछ नहीं कर सकती थी। जमना स्कूल जाती और अपनी माँ का काम में हाथ बटाती जमना के पापा के चले जाने से वो सब काम सिख गयी थी घर का भाई सब आगे अपने परिवार में रहते और जमना उसकी बहन और जमना की माँ रहते थे।
कुछ मदद कर देते थे भाई पर शादी होने के बाद भाई आगे हो गए थे। दो बहनो की शादी शहर में हूँ और एक की गांव में की गांव में बड़ी बहन की हो जाती है भाइयो की भी शहर में शादी होती है।
जमना की माँ पर जिम्मेदार बहुत आ जाती है। और जमना पढ़ी में होशियार होती है। आगे पढ़ना चाहती थी। और वो पढ़ी करती रही उस टाइम जमना की स्कुल की छुटियाँ हो थी है। जब गांव में रहने वाली बहन अपने घर आए होती है और जमना की बहन जमना से कहती है की छुटियो में मेरे साथ चलेगी गांव तो जमना तैयार हो जाती है जाने के लिए और वहाँ कुछ दिन बाद जमना की बहन से काम करती है
और खुद बच्चों का ऑपरेशन कर लेती है। जमना घर का सारा काम कर लेती है। जिसे देख के जमना की बहन के सुसराल वाले बहुत खुश होते है और देख के बोलते है जमना को भी अपने घर की बहु बना लेते है। अपने छोटे बेटे के लिए जो दोनों एक साथ खेलते रहते थी। एक दिन जमना अपने बेटी को लेने गांव आती है और खूब सामने देने के लिए लेती है तो शाम को सब बैठे होते है तो जमना की माँ से जमना की बहन की सांस कहती है।
की आपकी छोटी बेटी को भी हम लेना चाहते है। अपने छोटे बेटे के लिए तो जमना की माँ भी हा बोल देती है। क्युकी जमना के पापा ने पहले ही बोल रखा था। और साँस कहती है आप आई हुई तो हो क्यों ना दोनों की सगाई कर दी जाए। फिर उन दोनों की सगाई कर दी जाती है। और फिर वो अपनी माँ के साथ अपने घर आ जाती है। जमना की स्कुल भी खुल जाती है। ही फिर आगे की पढ़ी करने लगी थी।
अब देखो छोटी सी उम्र में क्या होता जमना के साथ
जमना ज्यादा बड़ी है होती है सगाई काफी टाइम रहती है। पर जमना की माँ दोनों की शादी साथ में करने का सोच लेती है। और जब जमना की बड़ी बहन का भी रिस्ता हो जाता है और जमना का पहले ही सगाई हो जाती है। एक दिन गांव में रहने वाली बहन के सुसराल वाले आ जाते है जमना के घर शादी के लिए बात करने के लिए अब जमना की माँ पर पहले ही जिम्मेबारी बहुत होती है। तो शादी के लिए हा कहे देती है। जब जमना नवीं क्लास में आए थी। उस महीने में दोनों बहनो की शादी हो जाती है। और जमना की पढ़ी भी छूट जाती है।
जमना गांव आ जाती है जमना के पति ऑटो चलते थे। घर का ऑटो था। जमना के सुसराल में सब की सरकारी जॉब होती है। बस जमना के पति को छोड़ के जमना के सुसराल में चार भाई और तीन बहने होती है। जिसमे सब की शादी हुई होती है।सब साथ में ही रहते थे। जमना का सुसराल बहुत बड़ा होता है। और सब से छोटी बहु जमना ही होती है। सब भाई के बच्चे भी होते है। जमना को गांव की भाषा काम समझ आती थी। वो हिंदी में बात करती थी। पर सुसराल में सब गांव की भाषा में बात करते थे। तो जमना को प्रॉब्लम होती थी वो समझ नहीं पाती थी हर बात अपनी बहन से सीखती थी। जमना काम बहुत करती थी अपने घर का तो सब को वो बहुत पसंद आती थी। ऐसे करते काफी टाइम निकले जाता है और जमना कुछ -कुछ समझ ने लगती है। फिर करने लगती थी।
दो साल बाद जमना के बच्चा होने वाला था। और जमना बहुत ही कमजोर थी। जैसे के लिए जमना को ऑपरेशन के लिए कहे दिया। तो डॉक्टर ऑपरेशन की तैयारी करते है और जमना ऑपरेशन रूम में ले जाते तो जमना बहुत डर जाती है। और हॉस्पिटल से भागने लगती है।
जमना को पकडे के लाया जाता है। डर से बी. पी.ज्यादा होने लगी। तो डॉक्टर ने बेहोशी के इंजेक्शन लगा दिया जाता है। और जमना ने एक बच्ची को जन्म देती है जो देखने में बहुत प्यारी गोलू मोलू और क्यूट बेटी को जन्म दिया था। उस डॉक्टर अपने पास ले जाते है। और जमना बेहोश ही होती है। और जमना का ब्लड नहीं रुकता तो डॉक्टर ने जमना को बर्फ की सिली पर लिटा देते है। और उस ब्लड रोक जाता है
कुछ टाइम बाद जमना को होश आ जाता है। पर डॉक्टर बच्ची को नहीं देते दो दिन तक वो अपने पास ही रखते है। जमना की तबियत ठीक नही होती है पर जमना की सासु माँ डॉक्टर कहते है बच्ची को दे दो तो डॉक्टर माना कर देती है और कहते है हम अपने पास रखगे बहुत प्यारी बेटी
को जन्म दिया है जमना ने तो जमना की सासु माँ को गुस्सा आ जाता है और कहती है में पुलिस को बुला लगी तो डॉक्टर बोलते है हम मजाक कर रह है गोलू मोलू सी है तो मन नहीं करता देने का फिर डॉक्टर कहते है जांच करने के बाद आपको दे देंगे। कुछ घंटो के बाद जांच कर के दे देते है। जमना को छुट्टी दे देते है। फिर जमना को घर ले आते है। और बच्ची को सब देख के बहुत ख़ुशी मानते है।
जमना के पति को डॉक्टर जमना का खाना पीना बाद कर देती है और कहती है की फल फुट खिलाना और पार्क में चलना है और जमना के पति वैसा ही करते थे। रोज शाम को पार्क ले कर जाते थे। ऐसे कुछ महीने चलता रहा जमना भी ठीक होने लगी।
एक दो महीने के बाद जमना के घर लड़ाई होने लगी क्युकी जमना अपने बहन के पास चली जाती थी। वह पर हर चीज़ होती थी जैसे जमना की सासु माँ लड़ाई करने लगी सारा दिन वही पर लड़की को रखती है। जमना के जीजू की सरकारी जॉब होती है और जमना सारा दिन अपने बेटी को ले कर अपने बहन के पास जाती रहती है। यह सब जमना की सासु को पसंद नहीं आता तो वो गुस्सा करने लगती है वही पर रह ले बात बहुत बढ़ने लगी
जमना तो इस लिए जाती थी वह पर पखा था और सब के कमरे में पखा था पर जमना के कमरे में नहीं था वो अपने बहने के पास चली जाती है पर लड़ाई के करने फिर जमना के जीजू ने नया पखा लगा देते है। फिर वही रहती है। सब से छोटी बेटी होने से जमना के सुसराल में जमना की बेटी से सब बहुत प्यार करते है
सब उस प्रियका के नाम से जानते थे। प्रियका का एक साल की होने वाली थी। तो प्रियका की नानी माँ उस लेने के लिए आती है और प्रियका पहला जन्म दिन मानती है और सब को बुलाती है बहुत धूम धाम और बेड बजा और डांसर भी आते है खूब पैसे लगती है प्रियका की नानी माँ प्रियका के जन्म दिन के बाद दस दिन रहते है अपनी नानी माँ के घर फिर प्रियका के पापा लेने आ जाते है।
जमना के सुसराल बहुत बड़ा होता है चार बेटे और तीन बेटी होती है सब की शादी की होती है पर प्रियका की बड़ी बुआ के सुसराल वाले रोज लड़ाई करते थे तो प्रियका के फूफा जी ने अपने सुसराल के पास मकान ले लेते है वही रहते है और दूसरे बुआ के सुसराल वाले भी बुरा होता है दोनों का एक ही घर में शादी होती है। एक जाती थी सुसराल और दूसरी ने कभी देखा नहीं एक को दुःख
इतना दुःख देते है तो दूसरी को नहीं भेजते बात तलाक तक आ जाती है जिस की एक लड़की भी होती है जो छोटी उम्र में मर जाती है। दोनों का एक साथ तलाक हो जाता है। फिर वो अपने घर पर ही काम करने लगते है वो घर पर पापड़ बेलते है सब साथ मिले के ऐसे चलता रहा
तीन साल बीत जाते है।
जमना ने एक बेटा को जन्म देती है वो भी बहुत प्यारा होता है घर पर ही जन्म होता है बेटे की देख भाल करती है कुछ महीने के बाद जमना को मानसिक प्रॉब्लम होने लगती है वो अजीब सा करने लगती है जमना को डॉक्टर और तांत्रिक को भी देखते है और अपने दोनों बच्चो से दूर हो जाती है । तबियत ख़राब होने से फिर जनमा के सुसराल वाले जगे-जगे देखने जाते थे और जमना की माँ और भाई को बोलते थे।
जमना का इलाज करने के लिए जमना पर बहुत पैसे लगते थे फिर भी सही नहीं होती फिर किसी ने माता रानी के बारे में बताया बहुत नाम था माता रानी का मदिर जाने के लिया कहा तो वो जमना और पूरा परिवार मदिर जाते है जहा पर हर प्रॉब्लम का इलाज किया जाता था जमना को देख के लगता था वो अब नहीं बचगी जमना की हालते बहुत ख़राब हो जाती है। जमना पुरे रास्ते अपने पति की गोद में बेहोश ही होती है।
और मदिर भी बहुत दूर होता है वो गाड़ी कर के जाते है। सुबह और शाम को पहुँच जाते है। और माता रानी मदिर में ले कर जाते है वहां जाते ही जमना के पति माता के चरणो में जमना को रख देते और प्रार्थना करते है की आप इन सही करो कुछ ही टाइम में जमना का कुछ हाल सही होता है।
तब उन मदिर के पुजारी बोलते है रात को आप सब को यह रोकना है। और सुबह की पूजा में सब को शामिल होना है मदिंर में कमरे होते है वो ले लेते है। फिर उस रात को जमना को एक सपना आता है जनमा को सपने में माता का रूप देखता है और माता रानी कहती है उठ और नहा के मेरे मदिर में फेरी लगा मैं तेरे साथ चलूँगी और पूजा पाठ लगी। तेरा सारा दुःख दूर हो जाएगा।
तो अचानक से उठती है और सारी बात अपने पति को बता देती है। जो भी सपने में देखा वो सब अपने पति को बता देती है। वो जा कर पडित को सारी बात कहे देते है। तो पडित कहते है माता ने तरसन दिया है तो आप जमना को अकेले ही फेरी निकल को कहते है। और माता का नाम लेती है फेरी लगने लगतीजैसे -जैसे फेरी लगती है। वैसे -वैसे जमना सही होती जा रही थी। जब तक पूरी तैयार नहीं होती फेरी लगती रहती है। जमना सही लगती है। और सब देखते है की आते वक़्त क्या था और अब क्या हो गया जिसे बोलते है चमत्कार हो गया।
पडित के पास जाते है। पडित जी कहते है माता ने जीवन दे दिया आपकी पत्नी को माता को अपने घर ले कर जाना होगा। माता ने जो सपने में कहा वो सब आपकी पत्नी को करना होगा। पूजा पाठ करनी होगी और चालीस दिन का नियम भी रखना होगा। जमना चालीस दिन किसी को अपना मुँह नहीं देखेगी। पुरे दिन घूँघट में रहगी।अपने बच्चो को भी नहीं देखेगी और फ़ास्ट भी रखेगी और कही जाना आना भी नहीं करना किसी के घर में अने का दाना पानी नहीं पिए चालीस दिन तक और रोज सुबह चार बज उठना होगा पूजा पाठ के लिए । जमना सब करने के लिए तैयार हो जाती है।माता के दरसने कर के चले जाते है सब बहुत खुश होते है और कहते है की माता ने बच्चो की सुन ली जमना को एक नया जन्म मिले जाता है ।
फिर आगे
जमना रोज सुबह शाम पूजा पाठ आरती किया थी अपने नियम में के अनुसार रहती है। और भगति में लगे रहती थी चालीस दिन वो सब करती जो माता ने सपने में कहा जमना की ज़िन्दगी बहुत अच्छी चलने लगी। ऐसे चालीस दिन होता रहा फिर जमना को माता फिर देखती है और कहती है की जिस माता कहती है जिस भक्ति भाव से तू मेरी पूजा की है उसी भक्ति भाव से मैं बहुत खुश हुई और मैं तेरे शरिर में प्रवेश करके सबका भला करना चाहती हूँ कोई तेरे दरबार से खाली हाथ नहीं जाएगा। रोते हुई आएगी हसते हुए जाएगी।
और कुछ दिनों में ऐसा ही होने लगा जमना पर माता रानी का आर्शीवाद होता है वो अपने परिवार में बहुत ख़ुशी जीवन मिले जाता है। जमना के पास किसी भी चीज़ की कोई कमी नहीं होती वो भी सब का इलाज करती है और सब का भला ही होता है सारा दिन पूजा पाठ में निकले जाता है। जमना का नाम हो जाता है दूर -दूर से लोगो आते थे। सब का भला होता था। ऐसे करते काफी टाइम बीत जाता है बहुत बड़ा मदिर भी बने जाता है और चारो और ख़ुशी यहाँ ही ख़ुशी होती है। जमना की ज़िन्दगी में बच्चे छोटे होते है वो पढ़ी करते और खेलते मस्त रहते और जमना अपने दुसरो के दुःख दूर करने में लगी थी सब बहुत सामना करते थे।जमना का एक नाम सा होने लगता जहा भी जमना जाती वहां सब माता के जैसे पूजे
पर एक दिन जमना की माँ की बहुत तबियत खराब होती है। जमना की माँ के गले में गाढ़े हो जाती है सब के कहने से वो ऑपरेशन कर लेते है। जैसे उनकी तबियत बहुत ख़राब रहने लगती है और वो जमना को बोलते है। और जमना सुनते ही रात की गाड़ी में चढ़ जाती है और सुबह शहर अपनी माँ से मिलती है और जमना देख के बहुत दुखी होती है जमना अपनी माँ को नाश्ता करती है पर उनसे खाया नहीं जाता है
जमना के हाथ से खा लेती है और हॉस्पिटल ले कर जाते है वो टैक्सी में जाते है और अपनी माँ गोदी में रखती है पर जमना की माँ ने आखरी सास ली और दम टूट जाता है। जमना बोलती रही माँ बात करो अभी हॉस्पिटल पोछने जाये गए जल्दी से डॉक्टर को देखते है। डॉक्टर कहे देता है की सॉरी मैं कुछ नहीं कर सकता यह सब सुन के जमना बहुत रोने लगती है जमना की हालते ख़राब हों लगती है जमना ही अपने माँ पर पैसे लगती है। पूजा करती है।
कुछ महीनो बाद
जमना के पास बहुत पैसे होते है वो सब की मदद करती थी बड़ी -बड़ी बहने होती उनके लिए सामने देती सोना चांदी बहुत होते है तो वो ऐसे बाट दिया करती थी रुपए भी देती थी कोई भी काम होता जमना को कहते थे और उनकी मदद करती ऐसे चलता रहा काफी सालो तक जमना सोचती सब मेरी अपने है बहन भाई जमना का एक भाई रहता है मुत्यु हो जाती है माँ के जाने के बाद जमना अपने भाई बहन को अपने माँ पिता समझती थी और वो भी बेटा बेटा करते थे जमना से सब बात करते थे।
अचानक एक दिन किसी ने कहा अब आप पूजा करते हो फिर बहु आ जाएगी तो कैसे होगा आपके बाद बहु नहीं कर सकती ना पूजा तो जमना सोचती है। पूजा के लिए माफ़ी मानती है। पर जमना को नहीं पता की ऐसा नहीं हो सकता माता रानी तो भगति से बहुत खुश थी। वो माफ़ी नहीं दे रही पर जमना को लगा मिले गयी होगी यह सब आपको आगे पता चले गया क्या हुआ कहानी में पूजा पाठ करना बंद कर देती है।
और आगे लड़की अब शादी नहीं करना चाहती तो लड़के की शादी के लिए घर में सब कहने लगे और रिस्ता देखने लगे एक अच्छा रिस्ता मिल जाता और धूम धाम से शादी करती है पर जमना का भाई आता है और पता नहीं क्या होता उनको वो शादी से एक दिन पहले बिना किसी को बताए चले जाते है जमना को यह सब बुरा लगता है तो वो हर जगह देखती है। पूरी रात नहीं आते जमना को फ़िक्र होने लगी। पर कही नहीं मिलते फिर जमना सुबह होते ही अपनी भाभी को कॉल करती है। तो भाभी कहते है वो तो यह पर आए हूँ है सुबह ही आए है। फिर जमना को जान में जान आती है। सब होते बस भाई नहीं होता जमना को दुःख बहुत होता अब कर भी तो क्या जमना के लड़के शादी हो जाती है। उस दिन के बाद जमना के भाई ने बात करना बंद कर दिया।
कुछ टाइम सब ठीक चले रहा था फिर कुछ साल में जमना सब बर्बाद होता जा रहा था और जमना भी बीमार रहने लगी कभी जमना के बच्चे ऐसे करते खुब पैसे लगते जमना के पास जो सोना -चांदी सब बिकने लगे हरी बीमारी में जमना के पास जो था सब लगने लगा।
वो सब से हेल्प मांगी कोई मदद नहीं कर रहा सब अपने दुःख गाने लगते थे जब की बुरे टाइम जमना ने सब की मदद की पर जमना के दुःख में कोई साथ दे रहा था ना भाई ना बहन हर रोज लड़ाई चलने लगी जमना के घर में सब जैसे दुशमन हो जमना के पास रहने वाली बहन तो सब से बुरी थी वो तो अपनी बहन से कभी प्यार नहीं करती थी वो भी लड़ाई करती थी उल्टा सीधा कहती जमना सब से दुःख हो कर अपना घर बेच देती है और सोचती है कोई मेरा है नहीं तो मैं यहाँ क्यों रहु रोते हुए घर बेच देती है।
जमना सब से दूर मकान ले लेती है जैसे बहुत दुःखी हो जाता है जमना अपनी बहन भाई की हेल्प मांगती है कोई साथ नहीं देता क्योकि जो जमना के साथ जो बने रहती वो जमना से जलती है सब को जमना के बार में उल्टा सीधा बता देती है और सब से दूर कर देती है जमना की बहन बहुत बुरी होती जो भी जमना से प्यार करता था उस उल्टा सीधा बता के जमना बुरा बना देती है जमना अपने परिवार में पहले दुःखी थी जमना के पति की तबियत ख़राब रहने लगी बच्चो का भी बुरा हल होने लगा पर मदद कोई नहीं कर रहा था जमना के परिवार से ना सुसराल से जमना कैसे अपनी ज़िन्दगी बीतने लगी वो जमना जाती है अब जमना खुद काम जाती है और अपने परिवार की मदद करती है। सब कुछ कर रह होते जमना की घर पर यह थी जमना की दुःख भरी कहानी अब देखो जमना अपनी लाइफ ख़ुशी से रहती है क्या बस आगे.,. . . . . . . . . . . .

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